महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति पर विवाद, शिक्षा मंत्रालय और यूजीसी को कानूनी नोटिस
चम्पारण टुडे /मोतिहारी। महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय (MGCU), मोतिहारी (बिहार) के कुलपति पद पर प्रो. संजय श्रीवास्तव की नियुक्ति को लेकर विवाद गहरा गया है। इस मामले में भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के सचिव को दीवानी प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 80 के तहत औपचारिक कानूनी नोटिस भेजा गया है।
चम्पारण टुडे /मोतिहारी।
महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय (MGCU), मोतिहारी (बिहार) के कुलपति पद पर प्रो. संजय श्रीवास्तव की नियुक्ति को लेकर विवाद गहरा गया है। इस मामले में भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के सचिव को दीवानी प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 80 के तहत औपचारिक कानूनी नोटिस भेजा गया है।
यह कानूनी नोटिस अधिवक्ता डॉ. संदीप पहल के माध्यम से प्रेषित किया गया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि प्रो. संजय श्रीवास्तव की नियुक्ति ने कुलपति पद हेतु निर्धारित वैधानिक पात्रता शर्तों का उल्लंघन किया है।
10 वर्ष के प्रोफेसर अनुभव पर उठे सवाल :-
नोटिस के अनुसार, कुलपति पद के लिए 21 मई 2022 को जारी विज्ञापन में केंद्रीय विश्वविद्यालय अधिनियम, 2009 और यूजीसी विनियम, 2018 के तहत विश्वविद्यालय प्रणाली में प्रोफेसर के रूप में न्यूनतम 10 वर्षों का अनुभव अनिवार्य किया गया था।
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत काशी हिंदू विश्वविद्यालय से प्राप्त सूचना के आधार पर यह दावा किया गया है कि प्रो. श्रीवास्तव को 4 अक्टूबर 2012 को कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) के तहत प्रोफेसर पद पर पदोन्नति मिली थी। इस प्रकार, जून 2022 की आवेदन अंतिम तिथि तक उनके पास आवश्यक 10 वर्षों का अनुभव नहीं था।
इसके अतिरिक्त, पटना उच्च न्यायालय के राम टवाक्या सिंह बनाम बिहार राज्य (2015) के फैसले का हवाला देते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि प्रोफेसर के रूप में अनुभव की गणना केवल वास्तविक पदोन्नति की तिथि से ही की जा सकती है, न कि किसी अन्य तारीख से।
फुलब्राइट संबद्धता पर उठे सवाल :-
कानूनी नोटिस में प्रो. श्रीवास्तव के बायोडाटा में उनके फुलब्राइट संबद्धता को लेकर विरोधाभासी दावों का भी उल्लेख किया गया है। 2016–17 के दौरान अमेरिकन यूनिवर्सिटी में उनके योगदान को एक जगह "Fulbright Visiting Professor" और दूसरी जगह "Fulbright Visiting Scholar" के रूप में प्रस्तुत किया गया है। नोटिस में यह दावा किया गया है कि ये दोनों पदनाम अकादमिक रूप से अलग हैं और इन्हें एक-दूसरे के स्थान पर नहीं उपयोग किया जा सकता।
उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश से जुड़ा मामला :-
गौरतलब है कि एक सप्ताह पहले उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने भी इसी तरह के एक मामले में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और शिक्षा मंत्रालय को नोटिस जारी किया है। यह मामला हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्री प्रकाश सिंह की नियुक्ति से जुड़ा था, जिसमें भी 10 वर्ष के प्रोफेसर अनुभव की अनिवार्यता पूरी न होने का आरोप था।
महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय में तीसरी बार अवैध नियुक्ति का आरोप :-
कानूनी नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय में यह तीसरी बार है जब कुलपति की नियुक्ति को लेकर वैधानिक उल्लंघन सामने आया है। इससे केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शीर्ष पदों पर नियुक्तियों की प्रक्रिया, सत्यापन तंत्र और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जांच और कार्रवाई की मांग :-
कानूनी नोटिस में शिक्षा मंत्रालय और यूजीसी से इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने, पात्रता की पुनः समीक्षा करने, संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो कुलपति की नियुक्ति रद्द करने की मांग की गई है। यह भी कहा गया है कि यदि 60 दिनों के भीतर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती है तो मामला सक्षम न्यायालय में ले जाया जाएगा।
यह मामला महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय की प्रशासनिक प्रक्रिया और कुलपति नियुक्ति के मानदंडों को लेकर गंभीर सवाल उठाता है, जिनका समाधान शिक्षा मंत्रालय और यूजीसी की त्वरित और निष्पक्ष जांच पर निर्भर करेगा।
पुरे मामले की जानकारी छात्र नेता आकाश कुमार ने जारी लीगल नोटिस को प्रेस नोट के माध्यम से दी।
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