सुगौली: करामत उल उलूम एकेडमी में हिफ़्ज़-ए-कुरान का शानदार आयोजन
अमरुल आलम की रिपोर्ट सुगौली, पू.च: प्रखंड के अमीर खा टोला मस्जिद के अहाते में करामत उल उलूम एकेडमी के जानिब से तक़रीब हिफ़्ज़-ए-कुरान करीम का एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की सदारत कारी बशीर अहमद ने की, जबकि नेज़ामत का फ़ इक़बाल कासमी ने अंजाम दिया। शेरे क़ियादत की ज़िम्मेदारी कारी नूर आलम ने संभाली और पूरी तक़रीब की निगरानी करामत उल उलूम एकेडमी के मोहतमिम कारी मोहम्मद अनस ने की। इस मौके पर मदरसा के ज़िम्मेदारान और उलमा-ए-किराम ने अपने ख़ि.....
अमरुल आलम की रिपोर्ट सुगौली, पू.च: प्रखंड के अमीर खा टोला मस्जिद के अहाते में करामत उल उलूम एकेडमी के जानिब से तक़रीब हिफ़्ज़-ए-कुरान करीम का एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की सदारत कारी बशीर अहमद ने की, जबकि नेज़ामत का फ़ इक़बाल कासमी ने अंजाम दिया। शेरे क़ियादत की ज़िम्मेदारी कारी नूर आलम ने संभाली और पूरी तक़रीब की निगरानी करामत उल उलूम एकेडमी के मोहतमिम कारी मोहम्मद अनस ने की।
इस मौके पर मदरसा के ज़िम्मेदारान और उलमा-ए-किराम ने अपने ख़िताबात में लोगों को बच्चों की तालीम की अहमियत बताई। करो. मोहम्मद अनस ने लोगों से ख़िताब करते हुए कहा कि आज के दौर में बच्चों को सिर्फ़ दीनी तालीम ही नहीं बल्कि दुनियावी तालीम भी देना उतना ही ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि इल्म के बिना न तो दीन की सही पहचान होगी और न ही दुनिया में तरक़्क़ी मुमकिन है।
कारी हैदर अफ़ाक़ ने अपने बयान में कहा – "एक रोटी कम खाइए, मगर बच्चों को हर हाल में तालीम दीजिए।" उन्होंने इस्लामी तालीम और दुनियावी इल्म दोनों पर बराबर ध्यान देने की अपील की। कार्यक्रम का सबसे अहम लम्हा वह था जब करामत उल उलूम एकेडमी के एक नन्हें तालिबे-इल्म ने कुरान-ए-पाक का हिफ़्ज़ मुकम्मल किया। इस पर उसे पगड़ी पहनाकर इज़्ज़त अफ़ज़ाई की गई।
पूरे आयोजन में बच्चों के हुस्न-ए-अख़लाक़, उनकी मेहनत और पढ़ाई की जज़्बे की ख़ूब चर्चा रही। बच्चों ने इंग्लिश, अरबी और हिंदी ज़बान में नज़्म और नाते भी पेश किए, जिन्हें श्रोताओं ने ख़ूब सराहा। कारी नूर आलम ने कहा – दुनिया और दीन की तालीम हर बच्चे के लिए ज़रूरी है। जो बच्चा पढ़ेगा वही अपने वालिदैन, समाज और मुल्क का नाम रोशन करेगा।"
इस मौके पर मौलाना मुफ्ती मुजीबुर्रहमान, इरशाद आलम साहब कासमी, मुफ्ती मोहम्मद मूसा और मौलाना आफ़ताब आलम सहित कई उलमा-ए-किराम मौजूद थे और उन्होंने अपने ख़िताब में तालीम और इल्म की अहमियत पर रोशनी डाली। पूरे प्रोग्राम में इल्मी और रूहानी माहौल रहा। उलमा-ए-किराम और अक़ाबिरीन की तक़रीरों से लोगों के दिलों में तालीम की शौक़ और बच्चों की तरबियत की सोच को और मज़बूत किया गया।
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